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रात में खाना खाने के बाद मैंने दरवाज़ा अंदर से बंद कर के दादीजी के कमरे में सोने चला गया.

चाची बोली कि "लल्लाजी तुम मेरे ही कमरे में आ जाओ, बात करते करते सोएंगे" मैंने कहा कि ठीक है और उनके कमरे में चला गया.

अंदाज़ से मैं उठा और चाचीजी को लाँघने के लिए उनके पांव पर हाथ रखा. चाची जी की साडी उनके घुटनों के उपर सरक गयी थी और मेरा हाथ उनके नंगी जांघों पर पड़ा था.

चाचीजी को कोई आहट नहीं हुई और मैं झट से उठकर रूम के बाहर पेशाब करने चला गया.

सिर्फ़ ब्लाउस के उपर से चुची दबाकर मज़ा नहीं आ रहा था.

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